यह मकबरा इटावा जिले के मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कहते हैं कि इस मार्ग पर यात्रा के दौरान भूतों का साया होता है। उनसे सुरक्षा के लिए इस पांच सौ साल पुराने मकबरे पर इबादत की जाती है। एक स्थानीय युवक इकबाल ने बताया कि खुद को और अपने परिवार को भूतों से बचाने के लिए भोलू सईद की कब्र पर जूते मारे जाते हैं।
पुरानी मान्यताओं के अनुसार इटावा के बादशाह ने अटेरी के राजा के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। बाद में इटावा के बादशाह को पता चला कि इस युद्ध के लिए उसका दरबारी भोलू सैय्यद जिम्मेदार था। इससे नाराज बादशाह ने ऐलान किया कि सैय्यद को इस दगाबाजी के लिए तब तक जूतों से पीटा जाए जब तक कि उसका इंतकाल न हो जाए। सैय्यद की मौत के बाद से ही उसकी कब्र पर जूते मारने की परंपरा चली आ रही है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इटावा-बरेली मार्ग पर अपनी तथा परिवार की सुरक्षित यात्रा के लिए सैय्यद की कब्र पर कम से कम 5 जूते मारना जरूरी है।
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