यह भी पढ़े: लड़कियों को अफेयर के लिए चाहिए ऐसे पार्टनर..!
इसके बाद अध्ययनकर्ताओं ने यही प्रयोग सिनेमा हॉल में किया। दर्शकों द्वारा खरीदे गए पॉपकॉर्न के पैकेट गिनकर उनका कुल वजन पता किया गया और सिनेमा हॉल में गिरे पॉपकॉर्न का वजन उसमें से घटाकर दर्शकों द्वारा खाए गए कुल पॉपकॉर्न के वजन का पता लगाया गया। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि ‘माई बिग फैट ग्रीक वेडिंग’ जैसी हल्की-फुल्की फिल्म देखने वाले दर्शकों की अपेक्षा ‘सोलेरिस’ जैसी दुखांत फिल्म देखने वाले दर्शकों ने औसतन 55 फीसदी अधिक पॉपकॉर्न खाया।
अध्ययन के मुख्य लेखक एवं कोरनेल विश्वविद्यालय के फूड एवं ब्रांड लैब के ब्रायन वानसिंक ने कहा, “दुखद फिल्में अपने दर्शकों को सामने पड़े स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ को खाने के लिए प्रेरित करती हैं। अपने भोजन में स्वास्थ्यप्रद फल या सब्जियां शामिल करने का यह बहुत ही अच्छा तरीका है।” इस प्रयोगशाला द्वारा किए गए एक अन्य अध्ययन का भी इस अध्ययन में समर्थन किया गया है, जिसके अनुसार, मार-धाड़ और रोमांचक फिल्में खाने के प्रति प्रेरित करती हैं, बशर्ते भोजन पहुंच में हो।
यह भी पढ़े: अगर बनना है पिता तो बदलना होगा आपके सोने का तरीका
अध्ययन में कुछ सुझाव भी दिए गए हैं। अध्ययनकर्ताओं ने अपने शोध में लिखा है, “फिल्में देखते समय कैलोरी बढ़ाने वाली चीजें दूर रखें और उन्हें रसोई में छोड़ देना ही बेहतर है। इच्छाशक्ति की अपेक्षा बेहतर योजना से आप कहीं जल्दी दुबले हो सकते हैं।” शोध पत्रिका ‘जामा इंटर्नल मेडिसिन’ के ताजा अंक में यह शोध-पत्र प्रकाशित हुआ है।

एक टिप्पणी भेजें