जानें- क्या है भारत-पाक के बीच सिंधु जल समझौता?


उरी में आतंकी हमले के बाद क्या भारत पाकिस्तान के साथ 56 साल पुराने सिंधु नदी जल समझौते से पीछे हट सकता है? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप का कहना है कि इस समझौते को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही काफी मतभेद है और ऐसे में कोई भी साझेदारी तभी तक चल सकती है जब तक आपसी सद्भाव और भरोसा कायम रहे. स्वरूप ने यह भी कहा कि ऐसे समझौते एकतरफा काम नहीं कर सकते।

भारत-पाक के बीच सिंधु जल समझौता 

यह समझौता दोनों देशों के बीच 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था।पाकिस्तान को भय था कि भारत के साथ युद्ध होने की स्थिति में उसका पानी रोका जा सकता है जिससे उसके यहां सूखे और अकाल की स्थिति पैदा हो जाएगी. समझौते के अनुसार भारत का तीन पूर्वी नदियों व्यास, रावी और सतलुज पर नियंत्रण है जबकि तीन पश्चिमी नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम के ज्यादातर पानी पर पाकिस्तान का अधिकार है।

पाकिस्तान का 65 फीसदी भौगोलिक क्षेत्र सिंधु नदी घाटी का हिस्सा है. उसकी सिंचाई, ऊर्जा उत्पादन और पेयजल की ज्यादातर व्यवस्था सिंधु नदी पर ही निर्भर है
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