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वेबसाइट का इस्तेमाल करने से दलालों की पहचान आसानी से हो जाती है इसलिए अब अपने इस धंधे को बरकरार रखने के लिए वो लोग सोशल मीडिया और मोबाइल एप्स का सहारा ले रहे हैं। यह कोई कहानी नहीं है बल्कि, इस तथ्य का दावा कुछ शोधार्थियों ने किया है जो पिछले कई महीनों से इस पर शोध कर रहे हैं।
रिसर्चर्स के मुताबिक वेबसाइट में दलालों की पहचान पता चल जाती थी, जिससे पुलिस को उन्हें पकड़ने में आसानी होती थी। लेकिन ऐसा करने से उन्हें सही दलाल के बारे में जानने में ही बहुत वक्त लग जाता है। इसी संदर्भ में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी और लोयोला यूनिवर्सिटी शिकागो के 71 क्रिमिनल का इंटरव्यू लिया गया और पूछा गया कि कैसे ऑनलाइन वेश्यावृत्ति पुलिस प्रवर्तन से प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि दलाल अपनी डील के लिए भ्रामक मार्केटिंग टेकनीक का इस्तेमाल करते हैं जो पुलिस को गलत एंगल में उलझाए रखता है।
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आज तकनीक ने वेश्यावृत्ति के रूप को एक नया आकार दिया है। यही वजह है कि 80 प्रतिशत सेक्स की बिक्री ऑनलाइन ही हो रही है। पुलिस और कानून अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं उन साइटों का पता लगाने कि जहां से यह अश्लीलता का जहर पूरे विश्व में फैल रहा है।

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