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बता दें कि पीड़ित लड़की झारखंड के गुमला की रहने वाली है। पिछले साल नवंबर में उसे इंस्पेक्टर के घर लाया गया था। बाल सरंक्षण आयोग को लड़की ने बताया की उसकी 6 बहनें हैं और माता-पिता गांव में ही रहते हैं। उसे घर से बाहर निकलने नहीं दिया जाता था। इंस्पेक्टर की पत्नी माधुरी बच्ची को सोने के लिए बिस्तर भी नहीं देती थी। सोमवार को जब एक पड़ोसी ने बच्ची के रोने की आवाज सुनी तो चाइल्ड हेल्प लाइन को जानकारी दी। इसके बाद श्रम विभाग और चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम ने इंस्पेक्टर के फ्लैट से उसे मुक्त कराया।
सीआईडी इंस्पेक्टर की पत्नी बंधक लड़की की जमकर पिटाई करती थी। बीमार रहने के बावजूद उसे काम करना पड़ता था। खाना भी सही तरीके से नहीं दिया जाता था। सीडब्लयूसी की सदस्य मीरा मिश्रा ने कहा कि इंस्पेक्टर कपल के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया गया है। चाइल्ड हेल्प लाइन के सुजीत गोस्वामी ने बताया कि बच्ची के बारे में फोन कर जानकारी दी गई थी। बच्ची को घर से निकालने में 1 घंटे का समय लग गया। इंस्पेक्टर की पत्नी बच्ची को लेकर झूठ बोलती रही।
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उनका कहना था कि बच्ची को वे अपने बच्चों को कंपनी देने के लिए रखे हुए हैं सीआईडी की आईजी संपत मीणा ने कहा कि मामले की जांच की जिम्मेवारी सीआईडी एसपी जया राय को सौंपी गई है। जांच में दोषी पाए जाने पर इंस्पेक्टर के खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई होगी।

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