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एक अंग्रेजी वेबसाइट में छपे शोध में सामने आया है कि बाहरवीं में पढ़ने वाले बच्चों के मुकाबले सातवीं कक्षा में तेजी से बच्चे यौन संबंध बना रहे हैं। पहली बार सेक्स करने वाले सातवीं क्लास के बच्चे तीन गुना ज्यादा एसटीआई से प्रभावित हुए हैं। शोध में बताया गया है कि चिकित्सीय एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं की चपेट में आने की वजहों में यौन संबंधों से होने वाला संक्रमण सबसे प्रमुख वजह है।
इस शोध को करने वाले एक शोधकर्ता ने इसके बारे में राय दी है। उन्होंने कहा, 'कम उम्र में जो बच्चे यौन संबंध बनाते हैं उनमें सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शंस होने के खतरे बहुत होते हैं। चूंकि उनकी उम्र कम होने की वजह से यौन संबंध बनाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में मालूम नहीं होता है इसलिए यह खतर ज्यादा बढ़ जाता है।'
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यह शोध सियोल के योनसेई विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया है। इसमें यौन संबंध बना चुके 22,381 नाबालिगों के जवाबों को शामिल किया गया था। मालूम हो कि सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन एसटीआई नाम से प्रचलित है और इसमें सूजाक, एचआईवी, क्लैमाइडिया आदि खतरनाक संक्रमण वो बीमारियां शामिल हैं।

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