...तो कैसे करें लड़की की वर्जिनिटी की पहचान?


अक्सर लोग वर्जिनिटी को लेकर एक-दुसरे से बहस करते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि लड़की का वर्जिन होना ज़रूरी है, तो कुछ लोग इसे दकियानूसी सोच का एक प्रमाण मात्र मानते हैं। पहले लोग वर्जिनिटी को लड़के के सेक्स संबंधों से दूरी का सबूत मानते थे, लेकिन जैसे-जैसे साइंस तरक्की करता गया है, वैसे-वैसे यह तथ्य गलत साबित होता गया है। ऐसे में वर्जिनिटी के बारे में आप कितने सहीं है और कितने गलत, आइये जानते हैं।

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वैसे अगर डॉक्टर्स की माने, तो वर्जिनिटी जैसा कुछ नहीं होता। यह सिर्फ लोगों द्वारा रचा गया एक शब्द है, जिसका इस्तेमाल बस युवतियों को उनके चरित्र का प्रमाण पत्र देने के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है। जब हम वर्जिन ये शब्द इस्तेमाल करते हैं, तो लोग सोचते हैं कि उस युवती ने पहले कभी किसी लड़के के साथ सेक्स सम्बन्ध नहीं बनाए हैं। लेकिन इसका सम्बन्ध लड़की के सेक्स संबंधों से नहीं, बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट पाई जाने वाली हाइमन से हैं, जिसका टूटना या नष्‍ट होना, वर्जिन न होने की पहचान के रूप में देखा जाता है।

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डॉक्टरों की माने तो हायमन के फटने का शरीरिक संबंधों से कोई लेना-देना नहीं होता। ये सच है कि सेक्स के दौरान हायमन डैमेज हो जाता है, पर ज़रूरी नहीं कि हर बार इसके डैमेज होने का यही कारण हो। लेकिन 90 प्रतिशत महिलाओं में यह साइकिल चलाने,  घुड़सवारी करने, डांस करने या किसी भी तरह की दूसरी फिजिकल एक्‍टिविटी के कारण पहले ही नष्‍ट हो चुकी होती है। और इससे युवती के चरित्र का अंदाजा लगाना अपने आप को धोखा देने के जैसा हो सकता है।

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