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- देवी-देवताओं के दर्शन करते वक्त कभी भी उनकी पीठ के दर्शन न करें। इससे अशुभता का संचार होता है, विशेषकर गणेश जी की पीठ में दरिद्रता वास करती है।
- मंदिर में एक ही देवी-देवता के दो स्वरूप रखना अच्छा नहीं होता। इससे गृह क्लेश बढ़ता है।
- देवी-देवताओं के खंडित स्वरूप किसी पवित्र नदी में बहा देने चाहिए। उनकी पूजा अथवा दर्शन करना नकारात्मकता में वृद्धि करता है।
- मंदिर में देवी-देवताओं के सुशील, मंद और शांत स्वरूप स्थापित करने चाहिए। इससे सकारात्मकता बनी रहती है।
- उग्र, तीव्र और निर्जन स्वरूप घर में नकारात्मकता लाते हैं।
- देवी-देवताओं के युद्ध मुद्रा में अथवा विनाशकारी स्वरूपों के दर्शन करने से जीवन में भयंकर संकटों का सामना करना पड़ सकता है।
- भगवान शिव का तांडव स्वरूप नटराज, भैरव बाबा, शनिदेव और राहु-केतु की प्रतिमाएं घर में नहीं रखनी चाहिए।
- जब भी देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित करें उन्हें एक दूसरे के आमने-सामने नहीं रखें।
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