गरुड पुराण के अनुसार भ्रष्टाचार करने वाले को मिलता है ये नरक


हिन्दू धर्म एवं संस्कृति में पुराणों का महत्व आदिकाल से रहा है। यही कारण है कि आज भी इनका प्रभाव लोगों के आम जीवन पर भी है। ऐसा माना जाता है कि पुराणों की रचना स्वयं ब्रह्माजी ने की थी। पुराण की रचना के पीछे मुख्य उद्देश्य मनुष्य को उचित—अनुचित का ज्ञान करवा नीतिपूर्ण जीवन व्यापन करने की प्रेरणा देते हैं।

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पुराणों में लिखे वृतांत व्यक्ति को बुरे कर्म करने से रोकते है और सद् मार्ग की ओर से अग्रसर होने को प्रेरित करते है। इनमें से गरुड पुराण भी एक है, जिसमें मनुष्य को नरक का भय दिखा कर बुरे कर्मों से बचने के लिए प्रेरित किया जाता है। जो लोग पापकर्म करते है उन्हें मरने के बाद यमदूत नरक में गिराते है और तरह तरह की यातनाएं देते हैं। 

-गरुड पुराण के अनुसार तामिस्र नामक नरक का उल्लेख मिलता है। इस नरक में वह व्यक्ति जाता है जो व्यक्ति दूसरों के धन ,स्त्री और पुत्र का अपहरण करता है, उस दुरात्मा को तामिस्र नामक नरक में यातना भोगनी पड़ती है। इस नरक में यमदूत उसे अनेक प्रकार की यातनाएं देते हैं।

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-धन चुराने या जबरदस्ती छीनने वाले प्राणी को मरने के बाद यमदूत संदंश नामक नरक में ले जाते है। जहाँ उसे अग्नि के समान संतप्त लोहे के पिंडों से दागा जाता है।

-दूसरों का धन लूटने वाले अथवा दूसरे की सम्पत्ति को नष्ट करने वाले को व्यक्ति को मरने के बाद सारमेयादन नरक में गिराया जाता है। जहां सारमेय नामक विचित्र प्राणी उसे काट-काट कर खाते हैं। यहां उसे काफी यातनाएं झेलनी पड़ती है।

-अधर्म के मार्ग पर चल कर धन कमाने वाले व्यक्ति को मरने के बाद यमदूत बैतरणी नदी में गिराते हैं। मलमूत्र, खून, हड्डी, मांस—मज्जा वाली इस नदी में प्राणी को नाना प्रकार के कष्ट दिए जाते हैं।

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