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मध्यप्रदेश का मंदसौर और नीमच ज़िले देह व्यापार की वजह से सुर्ख़ियों में बने रहते हैं। यहां दशकों से देह व्यापार चल रहा है और अब तो पिछले कुछे सालों में ये ''कारोबार'' फ़ैल भी गया है। अब जिस्मफ़रोशी के काम में छोटी-छोटी बच्चियों को भी झौंका जा रहा है। एक विशेष समुदाय के परिवार मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के रतलाम, मंदसौर व नीमच ज़िले में रहते है। इन तीनों ज़िलों के 68 गांवों में इस समुदाय के लोग रहते हैं। तीनों ज़िले राजस्थान की सीमा से लगे हुए हैं।
समुदाय में प्रथा के अनुसार घर में जन्म लेने वाली पहली बेटी को जिस्मफरोशी करनी ही पड़ती है। रतलाम नीमच और मंदसौर से गुजरने वाले हाई-वे पर समुदाय की लड़कियां खुलेआम देह व्यापार करती हैं। वे राहगीरों को बेहिचक अपनी ओर बुलाती हैं। इस धंधे में उनका पूरा परिवार मदद करता है।
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यूं तो मंदसौर व नीमच अफ़ीम की खेती के लिए जहां दुनियां में जाना जाता लेकिन देह व्यापार भी उनकी पहचान बन चुकी है। 150 साल पहले अंग्रेजों ने इन्हें यहां बसाया था और बाद में पेट भरने के लिए देह व्यापार इनका अपना मुख्य ज़रिया बन गया।
ये समुदाय कैसे वजूद में आया इसस बारे में कोई ख़ास जानकारी नहीं मिलती है। समुदाय के लोग खुद को राजपूत बताते हैं। उनका कहना है कि उनके वंशज राजवंश के इतने वफ़ादार थे कि दुश्मनों के राज जानने के लिए वो अपनी महिलाओं को गुप्तचर बनाकर वेश्या के रूप में भेजते थे। ऐसा भी कहा जाता है कि अंग्रेज़ क़रीब 150 साल पहले इन्हें नीमच में अपने सिपाहियों की वासनापूर्ति के लिए राजस्थान से लाये थे।
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