भारत में कुछ ऐसे भी स्थान हैं, जो वाकई में हैरान करने वाले हैं। आमतौर पर आपने फिल्मों में देखा होगा कि कैसे भुतही सीनों में लोग डरे होते हैं। वे जंगलों में, इमारतों में अपनी जान बचाने के प्रयास कर रहे होते हैं। लेकिन ये सब सच होता है क्या? क्या लोग वाकई में अकेले किलों में जाने से डरते हैं? क्या वे अमुक्त आत्माएं पुराने स्थानों में बसेरा बना रहती हैं? ऐसे सवाल अक्सर आपके मन में उठते ही रहते होंगे। इतना ही नहीं कुछ जानकार मानते हैं कि भारत में ऐसी कई इमारते हैं, जो भूत-प्रेत या भटकती आत्माओं के कारण सुर्खियों में रही हैं। इन जगहों पर भूलकर भी कोई जाना पसंद नहीं करता है। ऐसे स्थान हजारों वर्षों से एक भयानक श्राप को झेल रहे हैं।
जाने इन जगहों के बारे में
1. पिसावा के जंगल
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के पिसावा के जंगल वाकई आज के लिए उदाहरण है। यदि किसी को लकड़ी काटने से रोकने वाले जंगल देखने हैं तो पिसावा के जीते-जागते जंगलों को देख सकते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में देहात का यह हिस्सा बेहद रहस्यमयी है। ब्रजभूमि में ऐसी फंग हैं जिसमें अंदर घुसने से पर्यटक डरते हैं। कारण है कि सुनसान जंगल से अजीब-अजीब आवाजें सुनाई पड़ती हैं।
2. मेरठ का भूत बंगला
उत्तर प्रदेश के ही एक जिले मेरठ में बेहद डरावना किस्सा है भूत बंगले का। यह बंगला मेरठ के मॉल रोड स्थित कैंट बोर्ड के सीईओ के आवास के निकट है। सीईओ के आवास और व्हीलर्स क्लब के बीच (आशियाना गेस्ट हाउस के विपरीत) एक रास्ता अंदर की ओर जाता है। माल रोड से लगभग 650 मीटर अंदर जाने के क्रम में कई झाडिय़ों से भी जूझना पड़ेगा, लेकिन घबराने की बात नहीं क्योंकि बंगले की दहलीज तक पक्की सड़क है। हम भी जब इस बंगले तक पहुंचे तो कार और बाइक के पहियों के निशान दिखे। साफ था कि शुक्रवार की बारिश के बाद भी चहलकदमी हुई है। पीले रंग के बंगले में पांव रखते ही कबूतरों की फडफ़ड़ाहट की आवाज एक बारगी डरा तो देगी ही। 1947 के बाद इस बंगले को छोड़ सब एरिया मुख्यालय सरधना रोड पर बनाया गया, जहां पूर्व में अंग्रेजी अफसरों का अस्पताल था। अब भारतीय सैनिकों ने लोगों को यहां जाने से रोकने के लिए इसे रिज्यूम करने का फैसला लिया है।
3.भानगढ़ का किला अलवर
भानगढ़ फोर्ट, राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। यह भारत का टॉप मोस्ट हॉन्टेड प्लेस है। इसे आम बोलचाल की भाषा में भूतों का भानगढ़ कहा जाता है। इस बारे में रोचक कहानी है कि 16 वीं शताब्दी में भानगढ़ बसता है। 300 सालों तक भानगढ़ खूब फलता फूलता है। फिर यहां कि एक सुन्दर राजकुमारी रत्नावती पर काले जादू में महारथ तांत्रिक सिंधु सेवड़ा आसक्त हो जाता है। वो राजकुमारी को वश में करने लिए काला जादू करता है पर खुद ही उसका शिकार हो कर मर जाता है। पर मरने से पहले भानगढ़ को बर्बादी का श्राप दे जाता है और संयोग से उसके एक महीने बाद ही पड़ौसी राज्य अजबगढ़ से लड़ाई में राजकुमारी सहित सारे भानगढ़ वासी मारे जाते है और भानगढ़ वीरान हो जाता है। तब से वीरान हुआ भानगढ आज तक वीरान है और कहते है कि उस लड़ाई में मारे गए लोगो के भूत आज भी रात को भानगढ़ के किले में भटकते है। सरकार ने भी पर्यटकों को यहां अंधेरा होने से पहले चले जाने की चेतावनी जारी कर रखी है। लोगों का मानना है कि आज भी उस तांत्रिक की आत्मा वही भटकती रहती है।
4. जमाली-कमाली मस्जिद और कब्र
यह मस्जिद दिल्ली के महरौली में स्थित है। यहां सोलवहीं शताब्दी के सूफी संत जमाली और कमाली की कब्र मौजूद है। इस जगह के बारे में लोगों का विश्वास है कि यहां जिन्न रहते हैं। कई लोगों को इस जगह पर डरावने अनुभव हुए हैं। सूफी संत जमाली लोधी हुकूमत के राज कवि थे। इसके बाद बाबर और उनके बेटे हुमायूं के राज तक जमाली को काफी तवज्जो दी गई। माना जाता है कि जमाली के मकबरे का निर्माण हुमायूं के राज के दौरान पूरा किया गया। मकबरे में दो संगमरमर की कब्र हैं, एक जमाली की और दूसरी कमाली की। जमाली कमाली मस्जिद का निर्माण 1528-29 में किया गया था। यह मस्जिद लाल पत्थर और संगमरमर से बनी है।
5. अग्रसेन की बावड़ी
अग्रसेन की बावड़ी राजधानी दिल्ली में कनाट प्लेस से थोड़ी ही दुरी पर स्थित है। महाराजा अग्रसेन ने 14वीं शताब्दी में इस बावड़ी का निर्माण करवाया था। इसकी लंबाई 60 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर है। इस प्राचीन स्मारक को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का संरक्षण प्राप्त है। किसी जमाने में यह हमेशा पानी से भरी रहती थी, लेकिन अब यह सूख चुकी है। इसके बारे में प्रचलित है कि इसका काला पानी लोगों को सम्मोहित कर आत्महत्या के लिए उकसाता था। इसके तल तक पहुंचने के लिए 106 सीढिय़ां उतरनी पड़ती हैं। एएसआई के अधीन होने के बावजूद लोगो को इसके बारे में ज्यादा पता नही है यदि आप कनाट प्लेस जाकर भी किसी से इसके बारे में पूछेंगे तो वो अनभिज्ञता जाहिर देंगे।
6 डाउ हिल
पश्चिम बंगाल के दार्जलिंग जिले में स्तिथ एक हिल स्टेशन है। इसकी दार्जलिंग से दुरी 32 किलो मीटर है। इसकी ऊंचाई 4864 फीट है। कुर्शियांग का स्थानीय नाम खरसांग है। इसका मतलब होता है सफेद आर्किड की भूमि। कुर्शियांग मुख्यत अपने बोर्डिंग स्कूलों और पर्यटन के लिए जाना जाता है। पर कुर्शियांग से लगती डाउ हिल से एक मिस्ट्री जुड़ी हुई है जो की इसे भारत के टॉप मोस्ट हॉन्टेड प्लेस की लिस्ट में शामिल कराती है। डाउ हिल के जंगलों में बड़ी संख्या में आत्म हत्याएं हुई है। इस जंगल में इधर-उधर इंसानो की हड्डियां दिखाई दे जाना आम बात है। इसलिए यहां के वातावरण में अजीब सी सिरहन और दर महसूस किया जाता है। स्थानीय लोगो का कहना है कि दिसंबर से मार्च तक की छुट्टियों के दौरान उन्हें विक्टोरिया बॉयज स्कूल में पैरों कि आहट सुनाई देती है।
7. शनीवारवाडा किला
जब पश्चिम भारतीय प्रांत पर पेशवाओं का अधिकार था उस समय पेशवाओं के उत्तराधिकारी नारायण नामक बालक की उसके चाची के आदेशानुसार हत्या करवा दी गई थी। अपनी जान बचाने के लिए नारायण पूरे महल में घूमता रहा लेकिन फिर भी उसके हत्यारों ने उसे ढूंढ़ कर मार डाला। वह अपने चाचा को आवाज लगाता रहा पर कोई उसकी मदद के लिए नहीं आया। स्थानीय लोगों ने आज भी कई बार उसकी कराहने की आवाजें सुनी हैं। चांदनी रात में वह जगह और अधिक भयानक हो जाती है।
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